मुमकिन नहीं कि मैं तुझे भूल जाऊं ~Mumkin nahi ye ki main tujhe bhul jaun~ by loveshayari2021
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| मुमकिन नहीं कि मैं तुझे भूल जाऊं |
तुम्हारे बिना कैसे उम्र बिताऊं
मुमकिन नहीं ये कि मैं तुझे भूल जाऊं
हर तरफ नजर में है नजारा तेरा
देखा जिसको भी आया नजर चेहरा तेरा
दिल की गली से रूह के नगर तक
मन के जहाँ में है बस तेरा बसेरा
मुमकिन नहीं ये कि मैं वहाँ से तुझे निकाल पाऊं
तुमहारे बिना कैसे उम्र बिताऊं
ठलती शाम का रंग सुनहरी
जैसे तेरा आँचल हो संतरी
छत की मुंडेर पर जो टहले मोरनी
याद आऐ मुझको वो खेतो की पगडनडियों पर
लचक मचक कर चलने वाली चाल तेरी
पैर में फिर वो तेरी मोच का आना
कराह के तेरा वो जमी पे बैठ जाना
ऊठा लो मुझे बांहो में अपनी
अब मुझसे चला नहीं जायेगा जानी
क्या खूब था तेरा वो बहाना बनाना
मुमकिन नहीं कि मैं उन पलों को भूल जाऊं
तुम्हारे बिना कैसे उम्र बिताऊं
मुमकिन नहीं कि मैं तुझे भूल जाऊं ।।
Mumkin nahi ye ki main tujhe bhul jaun
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